जानिये एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट के लिए आवश्यक पॉइंट्स, Jaaniye employment contract ke liye important points
जानिये एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट के लिए आवश्यक पॉइंट्स, Jaaniye employment contract ke liye important points

जानिये एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट के लिए आवश्यक पॉइंट्स | Jaaniye employment contract ke liye important points

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जानिये एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट के लिए आवश्यक पॉइंट्स | Jaaniye employment contract ke liye important points

एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट अधिकांश बिजनेस के द्वारा बनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज (important document) है। यह ज़रूरी है कि एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट को एक प्रोफ़ेशनल से बनवाया (contract has been made by a professional) जाए ताकि कोई महत्वपूर्ण बिंदु छूटने की कोई आशंका (no possibility of any important point left in the contract) न बनी रहे। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि हर एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट में कौन से ज़रूरी बिंदु मेंशन (most important points to be mentioned) होने चाहिए।

एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट में हों ये सब बिंदु – Employment contract mein ho yeh sab points

  1. कर्तव्य और ज़िम्मेदारी – kartavya aur Jimmedaari

एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट में कर्मचारी के कर्तव्य और ज़िम्मेदारियाँ स्पष्ट रूप से मेंशन (mentioned it clearly) होनी चाहिए। इसके अलावा एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट में यह भी क्लास जुड़ा हुआ होना चाहिए कि जब वह आपके लिए जॉब करेगा और कहीं जॉब (till the person is doing job for you not doing work for any other company) नहीं करेगा।

  1. कार्य अवधि और दिन – Work time

एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट या अप्वाइंटमेंट लेटर (employment letter) में कार्य अवधि (काम के घंटे‌) और दिनों की संख्या अवश्य मेंशन (also mentioned working days) होनी चाहिए। ओवर टाइम के लिए पेमेंट का टर्म भी मेंशन (also mentioned payment for overtime) होना ज़रूरी होता है। काम के घंटे शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट (shop and establishment act.) में दिए रहते हैं। इसलिए कॉन्ट्रैक्ट बनाते समय उसके अनुरूप ही कार्य अवधि (must mentioned) लिखी होनी चाहिए।

  1. वेतन और भत्ते – Salary

एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट में कर्मचारी को मिलने वाली सैलरी साफ़ साफ़ मेंशन (salary mentioned clearly) होनी चाहिए। अगर कर्मचारी किसी प्रकार कोई हाउस (house), ट्रैवेल (travel) या अन्य एलाउंस (allowance) के लिए इलिजिबल है तो वह भी मेंशन करना चाहिए। अगर आवश्यकता हो तो सैलरी इंक्रीमेंट (salary increment), पर्क या ईएसओपी (esop) के बारे में मेंशन कर देना चाहिए। अधिकांश एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट निम्न रूप से अप्वाइंटमेंट लेटर में सैलरी ब्रेकअप की जानकारी (information of salary breakup) देते हैं –

टेक होम सैलरी की गणना – Counting the salary statistic

(1) बेसिक सैलरी + एचआरए + डीए

(2) कंवेयंस + मेडिकल ‌+ अन्य स्पेशल एलाउंस (other special allowance)

(3) पीएफ़ में एम्पलॉयर का भाग (part of a employer-बेसिक सैलरी का 12%), अगर मान्य हो

(4) ईएसआइसी (ESIE) में एम्पलॉयर का भाग (कुल सैलरी का 4.75%), अगर मान्य हो

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(5) पीएफ़ (PF) में एम्पलॉई का भाग (बेसिक सैलरी का 12%), अगर मान्य हो

(6) ईएसआइसी में एम्पलॉई का भाग (कुल सैलरी का 1.75%), अगर मान्य हो

(7) ग्रॉस सैलरी (gross salary) = (1) + (2)

(8) कॉस्ट टू कम्पनी (CTC-सीटीसी) = (1) + (2) + (3)

(9) टेक होम सैलरी (take home salary) = (1) + (2) – (5+6)

  1. बोनस – Bonus

अगर एम्लॉयर बोनस पॉलिसी फ़ॉलो (if following bonus policy) करता है, तब एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट (employment contract) में इसे भी अवश्य मेंशन करना चाहिए। बोनस किन परिस्थितियों (situation) में दिया जाएगा और कितना दिया जाएगा (and how much bonus) इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।

  1. छुट्टी की पॉलिसी- Policy of a leave

एम्पलॉयर की लीव पॉलिसी और एम्पलॉई का एंटाइटलमेंट कि उसे छुट्टी का पूरा पैसा मिलेगा या फिर आधा (half money or full for a leave), एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट में ये भी लिखा जाना चाहिए। कॉन्ट्रैक्ट में अर्न्ड लीव (under leave), कैज़ुअल लीव (casual leave), मैटनिटी लीव, (maternity leave) पेटरनिटी लीव (paternity leave) और सिक लीव (sick leave) जैसी छुट्टियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। भारत में अधिकांश 9mostly in india) एम्पलॉयर 10 दिन की अर्न्ड लीव और 12 दिन की कैज़ुअल लीव देते हैं।

  1. एम्पलॉयमेंट से टर्ममिनेशन – termination from job

ये बहुत आवश्यक है कि सभी एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट में कॉन्ट्रैक्ट टूट (breaking the contract clause) जाने का क्लाज़ स्पष्ट रूप से दिया गया हो। उसमें बताया जाना चाहिए किस आधार और किन शर्तों पर एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट टूट (why and how the contract can be break) सकता है। एम्पलॉयमेंट से टर्मिनेशन भारत मे बहुत से एम्पलॉयमेंट लाज़ की परिधि में आता है। अत: आवश्यक हो जाता है कि एम्पलॉयमेंट से टर्मिनेशन के बारे में एम्पलॉयमेंट लायर से कंसलटेशन ले (consult with employment lawyer) लेना चाहिए, ताकि यह काम क़ानूनी दायरे (legal) में हो।

  1. गोपनीयता – Secrets

अगर एम्पलॉई के कर्तव्य और ज़िम्मेदारियाँ ऐसी पोज़िशन (position) पर हैं, जहाँ उसे कम्पनी के ट्रेड सीक्रेट (trade secret) और गोपनीय जानकारियाँ (secret information) मालूम रहती हैं तो कॉन्ट्रैक्ट में गोपनीयता का क्लाज़ अवश्य (must add clause related to his) जुड़ा होना चाहिए। अनेक परिस्थितियों (situations) में जहाँ आवश्यकता रहती है, एम्पलॉय नॉन-डीसक्लोज़र एग्रीमेंट (employment non disclosure agreement) अलग से करवाया जाता है।

  1. सेवा काल – Work Time/ Time Period

अगर एम्पलॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट निश्चित समयावधि (particular time period)  के लिए हो तो वह समयावधि मेंशन होनी चाहिए, और कॉन्ट्रैक्ट के रिन्यू (renew the contract) होने की परिस्थितियों की जानकारी भी दी जानी चाहिए।

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